इस्कॉन मंदिर वृंदावन उत्तरप्रदेश की जानकारी: Iskcon Temple Vrindavan in hindi

हमारा देश भारतवर्ष हजारों सालो से अपने खूबसूरत मंदिर वँ उनकी बनावट वास्तुकला डिजाइन तथा शिल्प कला के लिए पूरी विश्व में प्रसिद्ध है. वँ इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण है.देश के हर प्रांत में बनी हुई ख़ूबसुन्दर महल हिन्दू मंदिर किला आदि। लेकिन आज के इस लेख में मैं आपको उत्तरप्रदेश राज्य के मथुरा में स्थित  इस्कॉन मंदिर वृंदावन के बारे में बताएंगे. उत्तरप्रदेश भी देश के अन्य राज्यो की तरह भव्य मंदिरों के लिए जाना जाता हैं. यहां तो कई ऐसे स्थान है, जिन्हें मंदिरों का शहर कहा जाता हैं.

इस्कॉन मंदिर वृंदावन उत्तरप्रदेश की जानकारी: Iskcon Temple Vrindavan in hindi
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परन्तु आज हम आपको उत्तरप्रदेश के प्रसिद्ध  श्री कृष्ण  बलराम मंदिर वृदांवन की जानकारी साझा करेंगे…यह प्रसिद्ध मंदिर उतर प्रदेश के मथुरा के वृदांवन शहर में स्थित हैं. यह श्री कृष्ण वँ उनके बड़े भाई बलराम जी को समर्पित मंदिर हैं इस मंदिर की सुंदर डिजाइन वँ खूबसूरत बनावट कला वँ संस्कृति, बहुत ही मनमोहक हैं इस प्रकार के मंदिर पूरे मथुरा में नही है. 

इसकी सुंदरता मंदिरों पर की गई खूब सुंदर चित्रकारी भारतीय सनातन संस्कृति के वैभव को याद दिलाती हैं.तो आइये जानते हैं विस्तार से,उत्तरप्रदेश के प्रमुख  ऐतिहासिक वँ पर्यटन स्थल के लिस्ट में शामिल प्रसिद्ध Iskcon Temple Vrindavan in hindi को-

इस्कॉन मंदिर वृंदावन का इतिहास History Of Iskcon Temple Vrindavan In Hindi

Iskcon Madir Ka itihas:  इस्कॉन मंदिर का अगर आप इतिहास देखेंगे तो आप पल भर के लिए चकित हो जाएंगे. यह एक संस्था हैं. जिसको Iskcon के नाम से जाना जाता है. जिसका पूरा नाम इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस हैं यानी ISKCON है. इस संस्था की स्थापना एक भारतीय पुरूष श्री भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी ने 1966 में न्यूयॉर्क में की थी. यह समाज मूल रूप से भगवान श्री कृष्ण द्वारा कहि गयी श्रीमद्भागवत गीता पर आधारित हैं. जिसका सम्बन्ध गौडीय वैष्णव संप्रदाय से है.

 जहां गौडीय का मूल अर्थ भारत के राज्य बंगाल के गौड़ प्रदेश से हैं.औऱ वही वैष्णव का अर्थ भगवान श्री विष्णु को पूजा करने वाले लोग से है. ऐसा कहा जाता है कि गौड़ प्रदेश से ही वैष्णव संप्रदाय की शुरूआत हुई थी.जो मुख्य रूप से श्री कृष्ण भगवान को ही अपनी हर विचार वँ भविष्य या पूर्व में हुई सभी प्रकार के कार्यों को समर्पित करते हैं ,साथ में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कही गई भागवत गीता और भक्ति योग का प्रचार प्रसार करना था. और इन्ही सब उदेश्य के पूर्ति के लिए इस्कॉन संस्था की स्थापना की गई थी।

ऐसा कहा जाता है कि श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान कृष्ण के बहुत बडे भक्त थे .तो कुछ लोग उन्हें भगवान विष्णु के अवतार भी कहते थे.श्री चैतन्य महाप्रभु श्रीमद्भागवत गीता के उपदेशों को हर आमलोगो तक पहुचाने के लिये इस्कॉन के माध्यम से वर्ष 1486 से 1532 के बीच में एक प्रथा को शुरू किया था. जिसके लिए स्वयं स्वामी श्री प्रभुपाद जी पूरे भारत मे इस्कॉन मंदिर बनवाना चाहते थे।

और इसकी शुरुआत भी उन्हों ने कर दिया था. 1975 में स्वामी प्रभुपाद जी ने मथुरा के वृंदावन में इस्कॉन मंदिर बनवाया था.जो देखने में इतनी ज्यादा खूबसूरत मंदिर थी कि कुछ ही वर्षों में यह मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया। इस्कॉन मंदिर वृंदावन निर्माण के दो वर्ष बाद में ही इस मंदिर के संस्थापक स्वामी श्री प्रभुपाद जी की मृत्यु वर्ष 1977 मे हो गई थी।जिसे बाद में मंदिर समिति द्वारा उसी परिसर में उनका एक स्मारक भी बनवा दिया।

इस्कॉन मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं Stories Of Iskcon Mandir Vrindavan  mathura In Hindi

जैसा कि हम सब जानते हैं कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम वँ अन्य साथियों के साथ वृंदावन में ही बचपन में गौ-गायों को चराने के लिए आया करते थे. और वही पर खेला करते थे. तथा यमुना नदी में स्नान करते वँ गोपियों के कपड़ों को चुरा लिया करते थे.इन्ही सब बातों से प्रेरित होकर यमुना नदी के किनारे पर वृंदावन में इस्कॉन टेम्पल का निर्माण किया गया है.

इस्कॉन मंदिर के बारे में रोचक जानकारी Interesting Facts About Iskcon Temple Vrindavan In Hindi

●वृंदावन में स्थित भगवान श्रीकृष्ण के इस्कॉन मंदिर का निर्माण कार्य सफेद सगंमरमर के पत्थरों से किया गया हैं

●इस मंदिर के सभी दीवार पर ख़ूबसुन्दर चित्रकारी पेंटिंग वँ अलग अलग तरह के डिजाइन तथा नक्काशी की गई है. इन चित्रकला में भगवान श्री कृष्ण के बचपन से लेकर उनके जीवन के बारे में तथा उनसे जुडी हर घटनाओं को संक्षिप्त रूप में ख़ूबसुन्दर तरीके से वर्णन किया गया है.

●इस्कॉन टेम्पल वर्ष में होने वाली दो त्यौहार एक श्री कृष्ण जन्माष्टमी वँ दूसरा होली का त्यौहार बहुत ही धूमधाम वँ बड़ी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.जिसमें भाग लेने के लिए पूरे विश्व भर से भगवान श्रीकृष्ण के भक्त आते हैं.

●इस मंदिर में कुल तीन वेदियों का निर्माण किया गया है. उनमें से मध्य वेदी पर भगवान श्रीकृष्ण तथा उनके बड़े भाई बलराम जी की पवित्र तथा अलंकृत- प्रतिमाये रखी गई है.

●इस मंदिर में स्थित सभी देवी-देवताओं की पहनावा को प्रतिदिन दिन में दो बार बदली जाती है.जिसके बाद ही प्रशिक्षित पुजारियों के द्वारा मंदिर के देवी- देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है.यहां आप सुबह शाम को होने वाले अतिमनमोहक आरती को देखकर आपके मन में एक अलग सा शांति अनुभव प्राप्त होगा.

●इस्कॉन टेम्पल का सबसे बड़ा खासियत यह है कि आप वहां वर्ष में जबभी जाएंगे तो वहां आप भगवान श्रीकृष्णके विदेशी पर्यटकों से जरूर मुलाकात होगी वो भी पूर्ण रूप से भक्ति भाव में बिभोर हुये।

●इस मंदिर का वातावरण पूरी तरह कृष्णमय भक्तिमय में लीन आध्यात्मिक नजर आती हैं.जिसके चारो दिशाओं वँ कोनो में कृष्ण ही कृष्ण नजर आते हैं.

●यहां प्रत्येक रोज मंदिर प्रांगण के भीतर ही सुबह वँ शाम को श्रीमद्भागवत गीता का पाठ का आयोजन किया जाता है. जिसे सुनने के लिए हजारों लोग आते है.

●इस्कॉन मंदिर में नित्यानंद,चैतन्य महाप्रभु,भक्तिवेदांत स्वामी श्री प्रभुपाद जी तथा भक्तिसिद्धान्त सरस्वती श्री ठाकुर का भी प्रतिमाएं भी लगाई गई है.

●वृंदावन के इस्कॉन मंदिर को श्रीकृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता हैं.

Iskcon Mandir Vrindavan Kirtan का समय प्रातः काल सुबह 8 बजे से 10 बजे तक वँ शाम 5 से 7 बजे तक होता है.

मंदिर परिसर में अन्य दर्शनीय स्थल

इस्कॉन मंदिर में दर्शक के देखने के लिए और भी कई चीज है. यहां पर दर्शक वृंदा कुंड के साथ साथ मे स्वामी प्रभुपाद की समाधि ,महाप्रसादम स्टाल,गुप्ता कुंड, भक्ति वेदना बुकट्रस्ट संग्रहालय ,गोशाला और प्रभुपाद हाउस आदि देख सकते हैं.

इस्कॉन मंदिर वृंदावन का समय Iskcon Temple vrindavan timing In Hindi

वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में साल के 365 दिन प्रातः काल 4 बजे सुबह में खुलती हैं. और मंदिर खुलने के पश्चात सर्व प्रथम समाधि आरती होती है. इसके तुंरत बाद भगवान श्री विष्णु के मंगल आरती होती है, इसके अलावा भगवान श्री गणेश वँ महादेव आदि देवी देवताओं की आरती की जाती हैं.मंदिर में आरती के बाद आमलोगों के दर्शन और घूमने के लिए मंदिर को खोल दिया जाता हैं. आप चाहेतो मंदिर के आरती में भी शामिल हो सकते है.

पुनः दोपहर को 12:30 में मंदिर के कपाट बंद कर दिया जाता है .और फिर सन्ध्या 4:30 में आमलोगों के दर्शन के लिए मंदिर को खोल दिया जाता हैं.तथा रात्रि 8:15 बजे मंदिर बन्द कर दिया जाता हैं.

वृंदावन का इस्कॉन मंदिर कैसे पहुंचें – How To Reach Iskcon Temple Vrindavan In Hindi

इस्कॉन मंदिर वृंदावन देश के किसी भी स्थान से बहुत ही आसानी से पहुचा जा सकता है.इसके लिए आप सड़क मार्ग, हवाई यात्रा, या रेलवे मार्ग द्वारा से आसानी से पहुंचे सकते हैं.आपको यह बता दें कि वृंदावन आगरा शहर के बिल्कुल पास में ही है. यहां से दिल्ली की दूरी 150km है.इसलिए आप दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उतरकर आसानी से मथुरा होते हुए वृंदावन मंदिर पहुंच सकते हैं.इसके अलावा आप आगरा हवाई अड्डे के माध्यम से भी पहुंच सकते हैं.यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा ही है.

Iskcon Temple Vrindavan Maps- इस्कॉन मंदिर का मैप

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